शि‍ल्‍पा द बि‍ग सि‍स्‍टर

January 30, 2007 at 9:00 am | Posted in चर्चा में | 5 Comments

शि‍ल्‍पा को ब्रि‍टेन के रि‍यलि‍टी शो में जीतने पर बधाई। शि‍ल्‍पा ने भले ही इस शो में कि‍सी नि‍जी स्‍वार्थ से प्रेरि‍त होकर भाग लि‍या हो लेकि‍न अनायास ही वो एक ऐसे पहलू को उजागर करने का नि‍मि‍त्त बनी जो पूरे वि‍श्व के सामने यक्ष प्रश्न है. इस घटना ने दक्षि‍ण अफ़्रीका में हुए गांधीजी के अपमान के ज़ख्‍म को जैसे हरा हो गया हो. यह घटना इस बात का सबूत है कि‍ नस्‍लवाद आज भी कहीं न कहीं पश्चि‍मि‍यों के ज़हन में है. भले ही वो इसे आज खुलकर बयाँ नहीं करते लेकि‍न यदि‍ उन्‍हें कि‍सी दूसरी नस्‍ल वाले देश के व्‍यक्ति‍ साथ महीनों अकेले छोड़ दि‍या जाए तो उनके सोए हुए भाव कभी न कभी तो जागेंगे ही ना। खैर, एक बात तो माननी पड़ेगी की इस घटना से ब्रि‍टेन और भारत के मानस के कई पहलुओं का पता चलता है, एक तरफ़ जेड गुडी हैं तो दूसरी तरफ शि‍ल्‍पा का समर्थन करने वाले हज़ारों ब्रि‍टि‍श नागरि‍क हैं जो नस्‍लभेद का वि‍रोध करते हैं, भारत की बात करें तो एक ओर स्‍वाभावि‍क रूप से इस घटना की कड़ी निंदा करने वाला बुद्धि‍जीवी वर्ग है तो दूसरी तरफ इसे कि‍सी चर्चा या बहस का मुद्दा न मानने वाले 68 प्रति‍शत आम लोग है. इन लोगों का कहना है कि‍ जि‍स देश में गरीबी, भुखमरी, कुपोषण, बेरोज़गारी, नि‍रक्षरता जैसी ज्वलंत समस्‍याएँ मौजूद हैं वहाँ वि‍देश में चल रहे कि‍सी टीवी शो में हुई कोई घटना महत्‍व नहीं रखती.
कुछ भी हो लेकि‍न शि‍ल्‍पा ने बि‍ग ब्रदर की जंग जीतकर ये साबि‍त कर दि‍या है कि‍ हम भारतीय कि‍तने धैर्यवान और क्षमाशील हैं.

अरूंधती (शि‍वानी)

5 Comments »

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  1. आपकी भावनाओं का सम्मान करता हूँ, तथा शिल्पा की जीत की खुशी में आपके साथ हूँ.

    साथ ही यह भी सच है की इस पुरे प्रकरण में सच कितना था कहना मुश्किल है

  2. सच जो भी हो पर यह जानकर खुशी हुई कि वहां कई संवेदनशील लोग हैं जिन्होंने इस नस्लभेद का विरोध किया।

  3. शिल्पा ने यह खेल नहीं जीता–जीत तो अंतत: नस्लवाद की ही हुई जो उनकी जीत के बदले नकार की स्वीकृति पर आधारित थी…कि इस घर में नस्लवाद पर कोई टिप्पणी नहीं हुई थी…ब्रिटेन में चुंकि भारतीयों का अर्थव्यवस्था पर दबदबा बना है इसकारण इतना हंगामा तो लाजमी था…अभी-भी अमेरीका में Red Indians की हालत किसी से छुपी नहीं है…यह जो द्वैत खड़ा है न वह हमारे नजरीये को नहीं बदल सकता…भारतीयता के प्रति आपकी सुंदर भावना को मैं Salute करता हूँ!धन्यवाद.

  4. कई बार ना चाहते हुए भी क्षमा करना पडता है, जब इतने सालों से साथ रह रहे अलग अलग धर्मो के लोग इक दूसरे को ताने मारने और मारपीट से बाज नही आते तो इन्हे क्या कह सकते है. खैर ये भी हो सकता है कि बात का बतडंग बनाया हो खैर अंत भला तो सब भला

  5. यह नि‍श्चित रूप से ख़ुशी की बात है कि जीतने वाली शिल्पा भारतीय हैं। हमने नस्लवाद के विरूद्ध आवाज़ उठाई और सफलता भी पाई परंतु देशी नस्लवाद का क्या करें। हमारी मानसिकता आज भी यही है – ये पंजाबी है, वो गुजराती है, वे साउथ इंडियन है, हम यूपी वाले हैं, वो तो बिहारी है, इस जात के लोग तो बड़े चालाक और काईयाँ होते हैं, ये तो हमसे छोटे (अमुक जाति के) हैं हम उनमें कैसे बेटी ब्याह दें, हम एमपी के हैं हम तो यहीं रिश्ता करेंगें, वे तो ऐसे होते हैं, वो तो वैसे होते हैं – अब बताईये इस भेद भाव को कैसे दूर करेंगे। शिल्पा के मामले में तो हम इतने बरसों की गोरों की ग़ुलामी की खुन्नस निकालने भिड़ गए थे।


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